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Carrots of Hope

इस जीवन के चक्र की यह अनोखी लीला
मन जो भी कहना चाहे, वह रह जाए अधुरा
कुछ कहना चाहे, पर वह कह ना सके
जिस तरह जीना चाहे, वह जी ना सके

हर दिया एक ही सी रौशनी फैलाए
पर अपने दायरें को कहाँ पार कर पाए
हर किरण, अपने संग, एक आंस साथ ले आए
पर झूठ की लहर कहाँ थम पाए

जब-जब हर बूँद, इस सागर में जुड़े
तब-तब यह दिल खुद से ही तुड़े
ना बाहर शाम सा अँधेरा, और ना अन्दर सुबह सा उजाला
मन अपनी ही चौकठ पर, रहे कब तक यूँ बेसहारा

ना सागर में स्थिरता, और ना इस जीवन में
ना खुशाली पनपती, है कभी इस मन में

मैं एक बात कहना चाहता था, पर, कह ना पाया
इन शब्दों के जंजाल में, मैंने आप को एक मुसाफिर ही पाया

- अंकित डांगी

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Ankit Dangi

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